अभिनव टाइम्स । रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ भारत में सिर्फ सेना या डिफेंस सेक्टर से जुड़े काम में ही सक्रिय नहीं है, बल्कि यह आम लोगों के लिए भी समय-समय पर नए रिसर्च करता रहता है. इन कामों के लिए डीआरडीओ को स्टाफ की जरूरत होती है. पिछले कुछ साल में यहां स्टाफ की कमी हुई है. ऐसे में अब खाली सीटों को भरने के लिए 1248 वैज्ञानिकों की भर्ती को वित्त मंत्रालय की सैद्धान्तिक मंजूरी मिल गई है. बताया जा रहा है कि स्टेप बाय स्टेप करके इस भर्ती प्रक्रिया को अगले 3-4 साल में कंप्लीट कर लिया जाएगा.
चरणबद्ध तरीके से होगी भर्ती
इस भर्ती प्रस्ताव के तहत डीआरडीओ की विभिन्न लैब्स में वैज्ञानिकों के कुल 814 पद खाली पड़े हैं. इसके अलावा वैज्ञानिकों के 434 नए पद भी बनाए गए हैं, जिन्हें भरने की जरूरत है. सरकार का कहना है कि यह पूरी भर्ती प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से होगी. सूत्रों के अनुसार स्वीकृत पदों की संख्या 7773 है. फिलहाल डीआरडीए में 6959 वैज्ञानिक काम करते हैं, जो की काम की तुलना में बहुत कम है.
मेक इन इंडिया थीम की वजह से स्टाफ की जरूरत
भारत सरकार पिछले कई साल अपने मेक इन इंडिया थीम काम कर रही है और उसे बढ़ावा दे रही है. इस अभियान के शुरू होने के बाद बाद मौजूदा स्टाफ पर बोझ बढ़ गया है. इसी को देखते हुए डीआरडीओ ने ये फैसला किया है कि जल्द से जल्द भर्तियां भरी जाएं. दूसरी ओर सूचना मिली है कि डीआरडीओ में वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करने के लिए परफॉर्मेंस रिलेटेड इंसेंटिव योजना (पीआरआईएस) के क्रियान्वयन की मांग चल रही है. इस प्रकार की योजना इसरो और परमाणु ऊर्जा विभाग में पहले से चल रही है.